शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

।।ग़ज़ल।।सज़ा तुमको मिलेगी ही ।।

।।ग़ज़ल।।सज़ा तुमको मिलेगी ही।।

निगाहे मत चुरा ,बेशक निगाहें तो पड़ेंगी ही ।।
निगाहें आइना दिल की, हक़ीक़त तो कहेगी ही ।।

नही समझे ,तो मत समझो हमारी चाह को चाहत ।।
सजेगी गम की महफ़िल तो सजा तुमको मिलेगी ही ।।

भले तुमने समझ रखा मेरे अश्क़ों को पानी सा ।।
अगर बरसेंगे ये आंशू ,कली दिल की खिलेगी ही ।।

हमारी ही वज़ह से तुम जरा सा मुस्कुरा पाये ।।
जरा तुम दूर हो देखो कमी मेरी खलेगी ही ।।

गुरुं मतकर अदाओं पर ,तमाशा चार दिन का है ।।
कोई मुड़कर न देखेगा उम्र तेरी ढलेगी ही ।।

…..R.K.M

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