।।ग़ज़ल।।यादो को मिटाने वाले।।
नज़र भर भी नही देखा नज़रो को चुराने वाले ।।
आज फिर आये थे मेरी यादो को मिटाने वाले ।।
बड़ी उम्मीद मुझको थी उनके मुस्कराने की।।
नाउम्मीद कर गये हर पल के मुस्कराने वाले ।।
ख़ुदा से भी बढ़कर एतबार किया करता था।।
हर वफ़ा भूल गये मुझको रुलाने वाले ।।
बड़ा सकून मिलता उनके नजर भर उठाने से ।।
मेरी सूरत ही मिटा बैठे फ़सलों को मिटाने वाले ।।
अब नजऱ न आया नज़रो की काशिस उनको ।।
जिसको ढूढ़ते रहते तस्वीर बनाने वाले ।।
ये ख़ुदा कभी भी उनका चेहरा नजर न आये ।।
मुझे भूल ही जाये अब मुझको मनाने वाले ।।
.. R.K.M
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