मंगलवार, 8 सितंबर 2015

मैं हूँ ही नहीं...!!

मैं हूँ या नहीं हूँ..!!
मैं हूँ तो क्या हूँ..?
नहीं हूँ तो कहाँ हूँ..?
ये कैसा सवाल है,
जिसका जवाब भी एक सवाल है..!!
किस पर यकीं करूँ मैं,
किस पर यकीं नहीं करूँ..!!
कैसा करेगा कोई यकीं,
कि मैं हूँ ही नहीं..!!
ये सिर्फ एक संयोग है,
या फिर शायद है सच..
कौन जान पाया आज तक,
कि इंसान क्या है..??
ढूंढो खुद को तुम अगर,
ढूंढ पाओ..!!
ना हो मुमकिन ढूंढना,
तो खुद ही मिट जाओ..!!

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