ताउम्र तुम्हेही चाहणे कि चाहत है
हर जनम तुम्हे पानेकी हसरत है
खुदा अगर है जन्नत मे बैठा कही
उससे तुम्हेही मांगने कि इबादत है
ऐ सनम तेरे हुस्नके चाहनेवाले हम
तेरी कशिशमे खुदको लुटायेंगे हम
दोनोके दरमियां जो लिखी दूरिया
उन दुरीयोको जडसे मीटायेंगे हम
तुझे खबर कहा हाल ए दिल ऐ हसी
हम बयां न कर पाये शायद बेबसी
मुकद्दरको बदलकर लिखना होगा
तुझे इन हाथोकी लकिरोमे हमनशी
शशिकांत शांडीले (SD), नागपूर
Mo. ९९७५९९५४५०


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