रविवार, 13 सितंबर 2015

दिल का खुदा

मोहब्बत मिल गई तो क्या करेंगे
कैसे तन्हा भीड़ में तड़पा करेंगे
नशा मिल जाएगा जो बिन जतन के
क्यूँ मयकश इसके लिए तरसा करेंगे
अब तो हम हरदम इसी को सोचते हैं
अपने दिल के उस खुदा को खोजते हैं
बाहर दुनिया में वो शायद ना मिलेगा
मन भीतर ही उसका हँसी चेहरा दिखेगा
देखकर जिसको ना फिर कोई प्यास होगी
खुशियाँ मिलेंगी उम्र भर की
और ना कोई अधूरी आस होगी।

शिशिर “मधुकर”

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