* स्वभाव *
लोगो का गजब स्वभाव हो गया
झूठ की पुलिंदा का उच्चा भाव हो गया
कर्मचारी हो कर अधिकारी बताते
अपना रोब खूब दिखाते
जब न हो लेना देना तो
आमद दुगनी बताते
देने की बारी आए तो
पूछ सुटका दाँत दिखाते
अपनी मज़बूरी गिनाते ,
लोगो का गजब स्वभाव हो गया
झूठ की पुलिंदा का उच्चा भाव हो गया।
लोग अपनी योग्यता और कार्य बढ़ा-चढ़ा कर बताते
उसी अनुरूप कार्य बता दो तो
चककर काटते और कटाते
सौ बहाने बना
अपना पत्ता भी छुपाते
आँख मिलाना तो दूर रही
बात करने से भी कतराते
लोगो का गजब स्वभाव हो गया
झूठ की पुलिंदा का उच्चा भाव हो गया।

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