सोमवार, 9 नवंबर 2015

गीत-आओ सुस्वागतम करें दीपों का-शकुंतला तरार

आओ सुस्वागतम करें दीपों का
सुस्वागतम करें दीपों का, आया समय है हर्ष का
नई ज्योति से नई आभा से जीवन के उत्कर्ष का ||

अभिनन्दन करें वंदन करें
नव पल्लव के गीत सुनाएँ
नए धंग से नई उमंग से
शुभागमन का गीत सजाएँ
जगमग –जगमग करता दीपोत्सव के पर्व का
सुस्वागतम करें दीपों का, आया समय है हर्ष का||

नए बीजों का हुआ अंकुरण
किया बहारों ने स्वागत गान
बगिया-बगिया क्यारी-क्यारी
महक उठा हर घर आँगन
झूम के देखें किसलय-किसलय में एहसास है दर्प का
सुस्वागतम करें दीपों का, आया समय है हर्ष का||

तारों के रथ में सजकर
आई है दीपों की अवलि
उमंग,उल्लास,उत्साह भरा मन
देता है पुष्पांजलि
छंट रहा मन का अंधियारा आतंक से संघर्ष का
सुस्वागतम करें दीपों का, आया समय है हर्ष का||शकुंतला तरार

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