गुरुवार, 19 नवंबर 2015

जब वो नहीं रही ?

जब वो नहीं रही ?
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जब तक वो साथ थी
सवेरा था, दिन था, रोशनी थी
सब कुछ था,
पर
वो अब नहीं रही…………..?
अचानक शाम हो गयी, कोहरा और अँधेरा ?
इतना घना अँधेरा, कि अब तो पता भी नहीं
कैसे कटेगी कटेगी कैसे
ये रातें लम्बी ज़िन्दगी की……………..?
सवेरा तो बहुत दूर, बहुत दूर जा चूका था ………?
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ललित निरंजन

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