सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

कलम ......... 9, 10, 11

कलम है अलबेली रानी
इसकी उम्र कभी छोटी नही होती !
निश दिन होती ये जवां
जीवन में ये कभी बूढी नही होती !! 9

…..

ना देना चुनौती कलम को
ये नामो निशा मिटा देती है !
जब रवानी पे अपनी जाये
सब अश्त्र शस्त्र झुका देती है !! 10

…..

“कह दो हुक्मरानो से
वो कलम को ना ललकारे !
जब ये चलती है,
धरी रह जाती है नंगी तलवारे !! 11

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डी. के. निवातिया………..!!

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