कलम है अलबेली रानी
इसकी उम्र कभी छोटी नही होती !
निश दिन होती ये जवां
जीवन में ये कभी बूढी नही होती !! 9
…..
ना देना चुनौती कलम को
ये नामो निशा मिटा देती है !
जब रवानी पे अपनी जाये
सब अश्त्र शस्त्र झुका देती है !! 10
…..
“कह दो हुक्मरानो से
वो कलम को ना ललकारे !
जब ये चलती है,
धरी रह जाती है नंगी तलवारे !! 11
!
!
!
डी. के. निवातिया………..!!

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें