“अदा”
मुस्कुराने की अदा सीखी है फूलों से गुनगुनाने की सदा सीखी है भ्रमरों से इतरा रही हूँ बागे बहारों में शान से दिललगाने की खता कर ली है शूलों से || शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)
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