गुरुवार, 3 सितंबर 2015

तेरा दर्शनाभिलाषी

प्यासे नैनो में आन बसो, ये गिरधर नागार
मैं तरसता बूँद बूँद को , तुम हो प्रेम सागर

विरह बेदना को तुम, अपने दर्शन से बुझा दो
और मुरझाये हुए मन में कृपा गंगा बहा दो

भवसागर पार क्या तेरे बिना कर पाउँगा
मिलना तेरा है जरुरी, नहीं तो डूब जाऊँगा

सुना है , हर डूबते का सहारा है तू
मैं कैसे कहूँ , की हमारा है तू

व्याकुल है मेरा मन सुनने मुरली की तान को
मधुर धुन छेड़ के, शांत करो अंतर्मन तूफ़ान को

जीवन के दिन अब बीत चले हैं ,मेरे गिरधारी
अंतिम सांस से पहले ,दर्शन दो कृष्ण मुरारी

मेरे ये अधर हर पल तेरा ही गुणगान करें
मेरा ये मन हर पल तेरे चरणो का ध्यान करें

भटक गया हूँ राह से, गले फाँस पड़ी दुःख जंजाल की
पल पल की खबर तुझे, आकाश,धरती और पाताल की

राधा संग दिल में बसो , कसम तुम्हे ग्वाल बाल की
हित ह्रदय में तुम्हे बसाकर मनाऊँ जन्माष्टमी इस साल की

हितेश कुमार शर्मा

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