सुख दुःख से बचना चाहते हो तो बंधनो को तोड़ दो
प्रेम तो सबसे करो पर आसक्ति को छोड़ दो
त्याग जब तक जीवन के हर अंश में न आ जाएगा
छोड़ आशा और निराशा सच पास कैसे आएगा
सिद्दार्थ ने हो बुद्ध ऐसे ही जीवन को जिया
राजा, प्रजा, शैतान, साधु साथ में सबको लिया
लक्ष्य उसने पा लिया जो बुद्ध की शरण गया
यूँ ही नहीं संसार ने उनकी शिक्षा को वरण किया
शिशिर “मधुकर”
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