मैं बच्चा ही अच्छा हूँ बड़ा नहीं मुझे होना है
अपने भोलेपन मस्ती को बिल्कुल भी ना खोना है।
मुझे नहीं है कोई चिन्ता कैसे जीवन चलता है
मम्मी पापा की मेहनत से मुझको तो सब मिलता है
बच्चे लड़कर भी जल्दी से फिर दोस्त बन जाते हैं
खुद हँसते हैं औरों के जीवन में खुशियां लाते हैं
करें वही जो ठान लिया है फिर चाहे जो होना है।
मैं बच्चा ही अच्छा हूँ बड़ा नहीं मुझे होना है
अपने भोलेपन मस्ती को बिल्कुल भी ना खोना है।
चोट लगे तो चिल्लाते हैं भूल भी जल्दी जाते हैं
शैतानी करनें के बाद छककर भोजन खाते हैं
मिल जाए टॅाफी और चाकलेट तो चाँदी हो जाती है
छोटी छोटी बातों पर भी खूब हँसी इन्हे आती है
पढ़नें को कहता है कोई तो कहते हैं सोना है
माँग ना हो जब कोई पूरी जमकर इनको रोना है।
मैं बच्चा ही अच्छा हूँ बड़ा नहीं मुझे होना है
अपने भोलेपन मस्ती को बिल्कुल भी ना खोना है।
शिशिर मधुकर
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