सोमवार, 7 सितंबर 2015

जिन्दा लाश चलती फिरती है !!

    1. न पूछो मेरी महफूजियत का आलम
      तेरी दुआओ से मेरी जिंदगी चलती है !

      मुख से हटे नकाब चाँद रोशन हो जाए
      जब झुके तेरी नजर लगे शाम ढलती है !

      हमने तो कर दिया खुद को हवाले तेरे
      जब तक है तू साथ, ये नब्ज चलती है !

      होती है रुसवा तेरी परछाई जब जब
      लगे जिस्म से अब जान निकलती है !

      टूट जाती है उम्मीदे जीने की जमाने में
      तब एक तू मेरे जीने की वजह बनती है !

      इस कदर शामिल है तू मेरी जिंदगी में
      जैसे सागर में लहरे टूट के बिखरती है !

      कौन कहता है “धर्म” मुर्दो में जान नही होती
      एक तेरे सहारे ये जिन्दा लाश चलती फिरती है !!

      डी. के निवातियाँ _______###

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