तेरी दुआओ से मेरी जिंदगी चलती है !
मुख से हटे नकाब चाँद रोशन हो जाए
जब झुके तेरी नजर लगे शाम ढलती है !
हमने तो कर दिया खुद को हवाले तेरे
जब तक है तू साथ, ये नब्ज चलती है !
होती है रुसवा तेरी परछाई जब जब
लगे जिस्म से अब जान निकलती है !
टूट जाती है उम्मीदे जीने की जमाने में
तब एक तू मेरे जीने की वजह बनती है !
इस कदर शामिल है तू मेरी जिंदगी में
जैसे सागर में लहरे टूट के बिखरती है !
कौन कहता है “धर्म” मुर्दो में जान नही होती
एक तेरे सहारे ये जिन्दा लाश चलती फिरती है !!
डी. के निवातियाँ _______###
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