मंगलवार, 8 सितंबर 2015

वो बात पुरानी हो गई ............

सपना बनकर रह गया, अब याद पुरानी हो गई
ताजा कुछ लम्हे जिनके, वो बात पुरानी हो गई !!

जब घर आँगन में
हम सब एक संग मिल खेला करते थे,
हुक्का गुड़गुड़ाते दादा जी,
हँसते-२ सबकी शरारत देखा करते थे,
लड़ते झगड़ते आपस में,
माँ, चाची, ताई से डॉट खाया करते थे,
थक हारकर फिर सारे,
रूठ रूठ कर दादी की गोद चढ़ जाते थे

सपना बनकर रह गया, अब याद पुरानी हो गई
ताजा कुछ लम्हे जिनके, वो बात पुरानी हो गई !!

जब छुट्टी मनाने के लिए,
हम नाना नानी के घर जाया करते थे,
मामा मामी बड़े प्यार से,
राजकुमारों जैसा स्वागत करते थे,
अकड़ में रहते थे हम अपनी,
सबको रौबीला स्वभाव दिखलाते थे,
छोटी सी बात में रूठे हम,
बनाकर पसंदीदा पकवान सब मनाते थे !

सपना बनकर रह गया, अब याद पुरानी हो गई
ताजा कुछ लम्हे जिनके, वो बात पुरानी हो गई !!

जब आता फाग महीना,
होली मिलन को सब एकत्रित हो जाते थे,
रंग देते थे एक दूजे को,
चेहरे हम सब बच्चो के एक जैसे दिखते थे,
सजती थी महफ़िल,
रन बिरंगे आँगन में ढोल और ताशे बजते थे,
बनते थे पकवान कई,
बच्चे बूढ़े और जवान, सब मिलकर कहते थे !

सपना बनकर रह गया, अब याद पुरानी हो गई
ताजा कुछ लम्हे जिनके, वो बात पुरानी हो गई !!

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डी. के निवातियाँ __________@@@

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