- हाथ जोड़ कर करे प्रणाम
लेकर अपने ईश्वर का नाम
अपने बड़ो को शीश झुकाये
तब शिक्षक दिवस मनाये !!सबसे पहले चरण वंदन
जग में माता पिता को
यदा गुरु को शीश नवाए
तब शिक्षक दिवस मनाये !!शिक्षा पहने बिक्री के चोले
हटा आवरण उस मुखोटे से
खुद को आत्मसात कराये
तब शिक्षक दिवस मनाये !!करे मूल्यांकन हम स्वंय का
किस उद्देश्य से पायी थी शिक्षा
क्या हम उस काबिल बन पाये
तब शिक्षक दिवस मनाये !!संस्कार विहीन सब दिखते यहां
आज इस नव युग के शिक्षालय
पहले उनका अवलोकन कराये
तब शिक्षक दिवस मनाये !!एक बार जरा करो विचार
प्रगति के इस बढ़ते चरण में
क्या अपने मूल्यों को संभाल पाये
तब शिक्षक दिवस मनाये !!विद्यार्थी में अब कितनी श्रद्धा
किस स्वरूप में शिक्षा को जाना
क्या शिक्षा के महत्व समझा पाये
तब शिक्षक दिवस मनाये !!शिक्षक रूप में ली थी शपथ
जग के उचित मार्गदर्शन की
क्या उसको सही दिशा दे पाये
तब शिक्षक दिवस मनाये !!भटका हुआ है आज नौजवान
पाकर शिक्षा कहता बेरोजगार
क्या उसको सही राह दिखा पाये
तब शिक्षक दिवस मनाये !!शिक्षक हर कोई बांटे जहां में ज्ञान
जो करे यथासमय उचित मार्गदर्शन
किसी के लिए बन जाए जीवन का आधार !
उसके लिए शिक्षक दिवस मनाये !!तब शिक्षक दिवस मनाये !
आओे ऐसे शिक्षक दिवस मनाये !
हाथ जोड़ कर करे प्रणाम !
अपने बड़ो और गुरुओ को शीश झुकाये !
आओे ऐसे शिक्षक दिवस मनाये………. !!
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*[ डी. के निवातियाँ ______@@@ ]
Read Complete Poem/Kavya Here तब शिक्षक दिवस मनाये !!

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