गुरुवार, 3 सितंबर 2015

आत्महत्या

आत्महत्या

चिडि़या
चींटी
कुत्ते
गाय
हर मौसम में
बिन घर-बार
ठौर-ठिकाने के
बिन उगाए-पकाए
अपनी पूरी जिंदगी
जीने की
भरपूर कोशिश की
और
इधर
एक मानव ने
सब कुछ
होते हुए भी
जरा से
मानसिक दबाव में
आत्महत्या कर ली!

Kashmir Singh

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here आत्महत्या

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें