आत्महत्या
चिडि़या
चींटी
कुत्ते
गाय
हर मौसम में
बिन घर-बार
ठौर-ठिकाने के
बिन उगाए-पकाए
अपनी पूरी जिंदगी
जीने की
भरपूर कोशिश की
और
इधर
एक मानव ने
सब कुछ
होते हुए भी
जरा से
मानसिक दबाव में
आत्महत्या कर ली!
Kashmir Singh
Read Complete Poem/Kavya Here आत्महत्या
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें