गुरुवार, 10 सितंबर 2015

वक़त के साथ चले !

खुली आंसमा में आज़ाद उड़े
आओ हम अपना तक़दीर लिखे
चली गयी बचपन के दिन यारो
आओ कुछ कर दिखाने को ठाने
वक़त के साथ चले ………..

युवा शक्ति हम देश के
विकास की नयी पथ बनाएँ
खुशहाली हो चारो ओर
इस जमीं को स्वर्ग बनाएँ
वक़त के साथ चले ………..

न रूठेगी तक़दीर न टूटेगी सपने
कहते है मेहनत से
यहाँ सबकुछ मिलता है
बेवजह कोई बहाना न करे
वक़त के साथ चले ………..

आशा की डोर हम न तोड़े
कर्तव्य से पीछे न हटे
आओ करे खूब मेहनत
जीत की परचम लहराए
वक़त के साथ चले ………..

अतीत न भविष्य वश में
आज को बर्बाद न करे
पथ की काँटों को उखाड़ फेंके
चाँद के भी पार चले
वक़त के साथ चले ……….

सपने भी होंगे अपने एकदिन
अटल साहस अपने पास रखे
झुक जायेगा आसमान एकदिन
अंदर अपने ज्ञान दीप प्रज्वलित रखे
वक़त के साथ चले ………….

दुष्यंत पटेल //कृष//

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