शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

अभी बाकी है.....

कहते हैं आजादी आधी रात को मिली थी
पर सुबह के सूरज का इंतजार अभी बाकी है…..

सुना है खून बहाया था नौजवानों ने
हर लहू की बूँद का कर्ज चुकाना अभी बाकी है…..

भगाया था जिन अंग्रेजों को अपने दम पर
तो क्यों अंग्रेजियत से छुटकारा पाना अभी बाकी है…..

अपनी शक्ति का लोहा दुनिया को मनवाया है
पर माँ बहनों की आबरु बचाना अभी बाकी है….

पहुँचने को तो पहुँच गये हैं हम चाँद और मंगल तक
पर हर गरीब के घर में चूल्हा जलाना अभी बाकी है…..

मनाये जरुर जश्न आजादी का खूब जोर शोर से
पर कुछ कुर्बानियों पर आँसू बहाना अभी बाकी है….

कहते हैं आजादी आधी रात को मिली थी
पर सुबह के सूरज का इंतजार अभी बाकी है…..

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