तेरी नादांनियों ने हमको यहा बदनाम किया
फिर भी नफरत नही होती है तेरे नाम से
पीने मे कितन भी कड़वी लगे ये मय साकी
दुश्मनी होती नही मयकशों की जाम से।
सोचा था तुझ से कभी बात ना करेंगे अब
और मिटा देंगे सभी यादें दिलो जान से
ऐसा कुछ भी ना हो सका है हमसे लेकिन
खामख्वाह हम ही हो गए हैं परेशान से।
जो तू अब भी नही समझेगा दिल कीबातें
आराम ना होगा कभी दर्द ए तन्हाई से
रोज मिलके भी फिर हम पास न आ पाएगे
दूरीयाँ मिट नही पाएगी दरम्यान से।
शिशिर “मधुकर”
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