नैनन नीर बहाए,
मुख से कहा न जाए,
प्रीत की मारी इस बिरहन को,
इक पल चैन न आये…..
प्रीत मा तुम्हरी जग को,
बैरी बनाये,
ताने देवत अपने पराये,
किस निर्मोही संग,
नैन लड़ाये…..
इस बिरहन की,
अरज तो सुन लो,
बिसरे जग इक तुम न बिसरों,
प्रीत की हमरी लाज तो रख लो……
विष का प्याला पी जायेंगे,
हम भी मीरा बन जायेंगे,
पहन की भगवे,
हम भी जोगिन कहलायेंगे ।

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