मेरा एक शब्द
मेरी जननी के नाम
जब पहली बार,
मुख से निकला होगा
वो प्रिय शब्द
जिसको मात्र
उसी ने सुना होगा,
फुले नही समायी होगी,
सुनकर दौड़ी आई होगी
भाकर बाहो में
ह्रदय से लगाया होगा,
हुई होगी असंख्यक
चुंबनों की बौछार
नैनों से नीर छलका होगा,
चेहरे पे अनमोल हंसी
जब रह-रह कर बही होगी,
कभी मेरा मुख देखती होगी,
कभी भर आलिंगन
मुझे छुपा लेती होगी,
कितने कष्ट सहे होंगे
सुनने को वो एक अक्षर
जिसमे समायी है दुनिया
देवो ने भी जिसके लिए
धरती पे जन्म पाया ,
आदि वही, अंत उसी में
मेरी दुनिया शुरू जिससे
ख़त्म भी वहो होंगी,
अधूरा जिसके बिन
ये सम्पूर्ण संसार
मेरे अन्म का
पहला अक्षर यही था
और आखिरी भी वही होगा,
“म” से ममता, “म” से मोह,
“म” से माया, “म” से मौत
हाँ .सब कुछ इसी में तो समाया
.. बस एक अनमोल शब्द
सबके लिए !!….”.माँ “….. !!
जिंदगी का मूल मंत्र
माँ…माँ…….”.माँ “….. और बस माँ $$$$$$$$ ……!!!( डी. के निवातियाँ )
Read Complete Poem/Kavya Here !! एक शब्द माँ के नाम !!


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