मंगलवार, 1 सितंबर 2015

लाल गुलाब

एक लाल गुलाब मुझे
सपनो मे रोज बुलाता है
अपनी लाल लाल पंखुडियो से
मन को मेरे मचलाता है
वो पूर्ण प्रतीक है प्रेम का
काटो के बीच स्नेह का
वो लाल रंग है त्याग का
कंटको की तीक्ष्ण चुभन से
वो मंद मंद मुस्काता है
मै ना बनू और कुछ
बस एक लाल गुलाब बनू
प्रेम,स्नेह,त्याग,बलिदान
लाल लहू की एक मूर्त बनू
ओ लाल गुलाब
जो तुम मुझे बुलाते हो
आती हू मै बन के अमन
ईष्या को यही सुलाती हू

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