गुरुवार, 3 सितंबर 2015

kavita

अपनी बात

कविताओं की
कलाओं में
साहित्य की
सभाओं में
क्यों उलझूं
'मैं'
मुझे तो
अपनी बात
सीधे कहनी है
शब्द के
आडम्बरों से परे
इशारों से भी पहले
समझ ले कोई
'बस'
ऐसी लेखनी कहनी है

Kashmir Singh

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here kavita

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें