बुधवार, 6 मई 2015

आना अभी बाकी है.....

एक छोटी सी याद चेहरे को फूल सा खिला देंगी !
करो याद के चेहरे पे रुआब आना अभी बाकी है !!

बीत न जाए बाकी बचे चंद लम्हे जिंदगी के !
लौट आओ मेरे पास के वक़्त अभी बाकी है !!

सबको चले जाना है एक दिन इस जहां से !
टूट न जाए ये सांसो की डोर अभी बाकी है !!

तोड़दो बंधन जमाने में सब झूठ दिखावे के !
ना बैठो यूँ उदास के जिंदगी अभी बाकी है !!

करेंगे तुम संग बैठकर गुफ्तगू चाँद रात में !
उस ख्वाब का हकीकत में बदलना अभी बाकी है !!

!
!
!
( डी. के निवातियाँ )

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here आना अभी बाकी है.....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें