पावस सी तू बूंद बना है…!
हृदय ये तपती धरती सा……!!
व्योम में व्याप्त पुलकित मानव…!
मेरी जीवन ज्योति सा…..!!
मृत्त जीव सी मेंरी आभा…..!
तूने जीवन सा छलकाया……..!
रोम-रोम जब शून्य हुआ तब…
तूने ही तन-मन महकाया……!!
बेगानी बेमानी रातें……….!
जो रो-रो बीता करती थीं…….!!
तूने ही आकर प्यारे मेंरी……..!
रातों को भी मुस्काया………..!!
वो वक्त कभी न भूलेगा……..!
जब दिल पर मरहम सा हाथ पड़ा…!!
तूने ही तो प्यारे मेंरा खोया बचपन लौटाया……।।
मैं इक क्षण और न जीती जग में…..!
तू खींच मुझे जग में लाया…..!!
आतंकित, अभिमानी रण में…..!
एक वीर मनु मैंने पाया……!!

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें