रविवार, 3 मई 2015

वीर मनु मैंने पाया

पावस सी तू बूंद बना है…!
हृदय ये तपती धरती सा……!!

व्योम में व्याप्त पुलकित मानव…!
मेरी जीवन ज्योति सा…..!!

मृत्त जीव सी मेंरी आभा…..!
तूने जीवन सा छलकाया……..!

रोम-रोम जब शून्य हुआ तब…
तूने ही तन-मन महकाया……!!

बेगानी बेमानी रातें……….!
जो रो-रो बीता करती थीं…….!!

तूने ही आकर प्यारे मेंरी……..!
रातों को भी मुस्काया………..!!

वो वक्त कभी न भूलेगा……..!
जब दिल पर मरहम सा हाथ पड़ा…!!

तूने ही तो प्यारे मेंरा खोया बचपन लौटाया……।।

मैं इक क्षण और न जीती जग में…..!
तू खींच मुझे जग में लाया…..!!

आतंकित, अभिमानी रण में…..!
एक वीर मनु मैंने पाया……!!

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