मंगलवार, 5 मई 2015

दिल उदास है बहोत

दिल उदास है बहोत कपि पैगाम ही लिख दो
तुम अपना नाम ना लिखो गुमनाम ही लिख दो
मेरी किस्मत में गम-ए-तन्हाई है लेकिन
तमाम उम्र ना लिखो, मगर एक शाम ही लिख दो

जरुरी नहीं के मिल जाये सुकून हर किसी को
सर-ए-बजम ना आओ, मगर बेनाम ही लिख दो
ये जनता हु के उम्र भर तनहा मुझको रहना है
मगर पल दो पल घडी दो घडी मेरा नाम ही लिख दो

चलो हम मान लेते है के सजा के हक़दार है हम
कोई इनाम ना लिखो कोई इल्जाम ही लिख दो

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