मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

तु क्यो दुर गया रे

मेरी स‍िमरन तेरा गुलसन
तु क्‍यो दुर गया
हम तडप तडप रहे
तु क्‍यो दुर गया रे तु क्‍यो दुर गया रे
मेरे दिल के फुल
अब ना जाना भुल
दिल तेरा सागर है
मै तो दरिया रे
प्रेम तपन को तडपाये
तु क्‍यो दुर गया रे
तुमसा फुल मिला ना हमको
हमसी खुशबु मिले ना तुझको
इतना क्‍यो तडपाये रे
खुशबु से मिला
तु अपने नैन
दिन को रहे उदास
रात को ना मिला चैन
इतना क्‍यो सताए रे तु क्‍यो दुर गया रे
तु अमर की रोनक
तु कलियो की जनत
मेरा चांद सा दिल
हे तेरी हसरत
इतना क्‍यो याद आए रे
तु क्‍यो दुर गया रे
आया तु हंसी बनकर
दिल मेरा फूलों मे सजाकर
हंसी को बनाकर
अब क्‍यों रूलाए रे
तु क्‍यो दुर गया रे
पेड से पते गिरे
नया सावन मिले
इस सावन में हम मिले
तब चाहत के फुल खिले
उन फुलों को होठो पर सजा रे
तु क्‍यो दुर गया रे
भौरे को खुशबु को चुगना
तुम्‍हे क्‍या गबराना
तडप पे दिल को कभी याद करना
अब तो आजा रे
तु क्‍यो दुर गया रे
मोसम बदले जीवन बदले
रात को लेते करवटे
दिल के होते दुकडे
तु क्यो नही आया रे
तु क्‍यो दुर गया रे
मिलन हमारी चाहत
चाहत है नदिया
प्‍यार हमारा सागर है
तु नदी है मै तो झरना रे
अब तो आजा रे
तु क्‍यों दुर गया रे
होठो से तुझे चुम्‍मा आखों पर सजाया
कितने दिन के बाद अब तु आया
अब प्‍यास बुझारे
तु क्‍यो दुर गया रे
तु मिलने आया
खुशी का चांद मुस्‍कुराया
दिल के फुल खिल खिलायें
अब क्‍यों तडपाए रे
तु क्‍यों दुर गया रे

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