मंगलवार, 15 दिसंबर 2015

अतीत के गुलाम ---राजन कुमार मिश्र।

कल तुम थे,आज हम है।
ये चक्र है,कुचक्र नहीं।
यहां देर है,अंधेर नहीं।
कल तुम थे,आज हम है।
कल अतीत था,आज वर्तमान है।
यह लोकतंत्र है,राजतंत्र नहीं।
राजा भी रंक है,रंक भी राजा है।
जियो वर्तमान में भविष्य में नहीं।
भूलों अतीत को वर्तमान को नहीं।
समझो विधि का विधान ही सही।
जिये हम भी समझ के यही।
कल तुम्हारा था,आज हमारा है।
ये नसीब तो खुदा ने समझ के संवारा है।
कल तुम थे,आज हम है।
—-राजन कुमार मिश्र।

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