रविवार, 13 दिसंबर 2015

सर झुकाऊँ कैसे,,,,,,,

दर्द कितना है इस दिल में बताऊँ कैसे ,
मुस्कुराती आँखों के आँसू दिखाऊँ कैसे,
मंज़िल सामने है मेरे, रास्ता मुश्किल बहुत,
इन मुश्किलों को राहों से हटाऊँ कैसे,
मुस्कुराती आँखों,,,,,

ज़िन्दगी दौर है अब बेबसी का ,
है बेबसी ही साथ मेरे
इन मायूस आँखों में
उम्मीदों की लौ जलाऊँ कैसे
मुस्कुराती आँखों ,,,,,

लाख घटाएँ छुपाएँ तारे आकाश में ,
कामयाबी का सितारा है मुठ्ठी में मेरे,
हूँ “अपराजिता “नहीं मैं सिर्फ नाम की,
चंद ग़मों के आगे सर झुकाऊँ कैसे
मुस्कुराती आँखों के आँसू दिखाऊँ कैसे,,,,!!!!

सीमा ” अपराजिता “

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