बुधवार, 9 दिसंबर 2015

सागर ने मुख मोड़ा तो नदी झरने से रूठ गए
दिल आज दिलदार से रूठ गए
हमें सिकवा जमाने से किया
आज अपने आप से रूठ गए…
दिल की धड़कन माना था जिसे
हर बेचैनी की राहत माना था जिसे
आज वह दोस्त हमसे छुट गए
यार,यार से रूठ गए
आज अपने आप से रूठ गए…
साथी छुटी राहे रूठी
आज अकेले-अकेले से हो गए
आज जाना दुनिया को
दुनिया भी छुटी जग भी रूठे
चार दिन की हैं जिन्गी
यही आस लेकर जी रहे
आज दिन भी हमसे रूठ गए
आज अपने आप से रूठ गए…
खुशियाँ थी जब मेरे चेहरे पे
खुशि भी आज गम हो गए
नम हो गई जब ये आँखे
जब दिल के रिस्ते तोड़ गए
देखी थी जो हमने सपना
सपना वो भी आज टुट गए
आज अपने आप से रूठ गए…
जीने की जब चाह थी
जिन्दगी ने ही साथ छोड़ गए
मौत को जब गले लगाने की सोची
मौत ने भी मुह मोड़ लिए
जीके ही अब मैं किया करू
जिन्दगी ने हमसे नाता तोड़ गए
आज अपने आप से रूठ गए…!!!

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