शुक्रवार, 15 जनवरी 2016

क़िता ( मुक्तक ) - 4 तारों की अंजुमन को सजाने लगे – MUKTAK SALIM RAZA REWA

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तारों की अंजुमन को सजाने लगे हैं वो *
महताब बनके मुझे को लुभाने लगे हैं वो *
अब प्यार का यक़ीन सा होने लगा मुझे *
शरमा  के मुझसे नज़रें चुराने लगे हैं वो *
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सलीम रज़ा रीवा 9981728122

Taron ki anjuman ko sajane lage hain vo –
Mahtab banke mujhko lubhane lage hain vo –
Ab pyar ka yaqeen sa …. hone laga mujhe –
Shrma ke mujhse nazaren churane lage hain vo –

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