रविवार, 17 जनवरी 2016

कोई वजह बता दो

किस तरह जिये कोई तरकीब सुझा दो,
मुझे अगर जीना है तो कोई वजह बता दो.
ये सिसकिया, ये शोर, ये मातम..
सब कुछ छीन रहे है मुझसे,
रह्ना है मुझे यहांं तो कोई रासता दिखा दो.
हर तरफ अन्धेरा है, नही कोई सवेरा है,
सिर्फ घुटन ही है,
हर तरफ आग की लपटे है,
क्या देखुंं, क्य दुआं करुं मैं?
क्या मांगु, क्या सोंचु मैं?
बस इतना बता दो.
कोई कराह रहा है, कोई बेसुध है,
कोई बेजुबां है, कोई जीना भूल गया है,
किस तरह गुजर रही है जिन्दगी?
किस राह से गुजर रही है जिन्दगी?
किससे शिकायतें की जाएं?
किससे दिल का हाल सुनाएं?
हर किसी की कुछ मजबुरी,
हर किसी की अपनी कहानी,
रहम करो कुछ इस तरह,
हर फूल अपनी मुस्कुराहट,
दुनियां में फैला पाएं,
ये अन्धेरी रातें रौशन हो,
हर पक्षी सुर में गा पाएं!

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