काश…….तेरी यादों की परछाई न होती, हर महफ़िल मे इस क़दर रुसवाई न होती, हम भी होते हर वक़्त ज़िंदगी से रूबरू, ऐ-खुदा गर तूने मोहब्बत जैसी चीज़ बनाई न होती…!!
Acct- इंदर भोले नाथ…
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