सोमवार, 18 जनवरी 2016

नारी शक्ति नारी सम्मान

नारी शक्ति नारी सम्मान

अबला जीवन हाय तेरी यही कहानी ,
आँचल में है दूध ,आँखों में पानी।
महादेवी वर्मा ने ये पंक्ति ५० वर्ष पहले कही थी , सोचो समाज की क्या परिस्थिति रही होगी तब ।
लेकिन तब से अब तक हमारी सोच में काफ़ी परिवर्तन आ गया है ,
नारी सम्मान और नारी शक्ति विषय पर एक कविता बनायी है पसंद आए तो होंसला बढ़ाना ।

घर घर में जब होगा बहू और बेटियों का आदर सम्मान,
समाज में तभी हो पाएगा नारी का समुचित उत्थान।
घर घर में नारी जब कर पाएगी अपने भावों की अभिव्यक्ति ,
तभी पनप पाएगी समाज में अभी तक दबी नारी शक्ति ।
बेटी पैदा होने पर जब घरों में बजेगें ख़ुशियों के ढोल ,
तभी दक़ियानूसी विचार त्याग कर निकलेंगे हमारे बोल।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का पालन करेगा जब हमारा समाज ,
तभी मजबूत होगी सारे देश में महिला वर्ग की आवाज़।

Napolean once said: Give me good mothers and I will give you a great nation.
इससे ज़ाहिर होता है की नारी का सम्मान कितना आवश्यक है और नारी शक्ति में कितना दम है।

जब बेटी पाने की चाहत में माँ बाप का मन होगा उतावला,
तभी तो बड़ी होकर बन पाएँगी वो कल्पना चावला।
जब बेटी पैदा होने पर घर में बजेगी शहनाई ,
तभी तो बड़ी होकर बनेगी वो रानी लक्ष्मी बाई ।
जब ससुराल वाले बहू पर करेंगे बेटी जैसा गुमान,
तभी तो समाज में मिलेगा नारी को उचित सम्मान ।
न पनप ने दे दुर्योधन और दुशासन जैसी सोच वाले शैतान,
तभी बढ़ेगा हर युग में द्रौपदी का आत्म सम्मान।
दहेज और महिला उत्पीड़न पर लगेगा जब अंकुश,
तभी मानव समाज की आधी दुनिया रहेगी ख़ुश ।

देश की कुछ महान , सम्मानित और शक्ति शाली महिलाओं को तो आप जानते ही है :

ग़रीबों, लाचारों और बीमारों की सेवा में लीन रहकर हासिल किया मुक़ाम,
ऐसी nobel prize winner mother teressa को कोटि प्रणाम ।
महिसासुर का वध करके जिसने दी असुरों के इलाक़े में दस्तक,
ऐसी माँ दुर्गा के आगे शीश झुकाते हम होकर नतमस्तक।
Badminton में तोड़ दी जिसने China की great wall,
किसकी बेटी नहीं बनना चाहेगी साइना नेहवाल ।
IAS में रहकर दिखाई जिसने ईमानदारी की मिसाल ,
कौन भूल सकता है वो दुर्गा शक्ति नागपाल।
टेनिस जगत में जीत रही जो ख़िताब पर ख़िताब,
कौन नहीं पढ़ना चाहेगा सानिया मिर्ज़ा पर लिखी किताब।
आज भारत की नारी हर क्षेत्र में कर रही है प्रगति,
police और फ़ौज में भी हो रही महिलाओं की भर्ती।।

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