तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं
जां निसार करते थे जां निसार करते हैं !
ख़ुश रहे हमेशा तू हर ख़ुशी मुबारक हो
ये दुआ खुदा से हम बार – बार करते हैं !
लोग दोस्तों पे भी उँगलियाँ उठाते हैं
हम तो दुश्मनों पर भी एतबार करते हैं !
वादे में है सदाक़त है लौट के वो आएगा
इस उम्मीद में हम तो इंतज़ार करते हैं !
हम तो जान दे देते उनके इक इशारे पर
दोस्तों वो हमको कब शुमार करते हैं !
फूल सा खिला चेहरा आँख वो गज़ालों सी
आके ख़्वाब में अक्सर बेकरार करते हैं !
क्यूँ ”रज़ा” शराफ़त के मुश्कबार आँचल को
अस्मतों के शैदाई तार – तार करते हैं !
17.3.13
sadaaqat-सदाक़त – صداقت -truth, sincerity,
mushk-baar,मुश्क-बार.مشک بار -diffusing musk, scented
shaidaa.ii शैदाई.شیدائی -lover, enamoured;
Read Complete Poem/Kavya Here तुमको प्यार करते थे तुमको प्यार करते हैं - GAZAL SALIM RAZA REWA
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