अंग्रेज़ी सीना तान घमण्ड में खड़ी है।।
दूर कहीं कोने में ‘हिंदी ‘उर्दू ‘लज्जित पड़ी है।।
नमस्ते सलाम की जगह लेली hi ने।।
अलविदा दस्तूर को लात मर दी bye ने।।
घरो में छाई gud morning evening की शान
गायब ही हो गया पाऊं छूकर कहना प्राणाम।।
अब तो हर जगह लगे अंग्रेज़ियत ही बड़ी है।
दूर कही कोने में ‘हिंदी”उर्दू’ लज्जित पड़ी है।।
अंग्रेज़ी साहित्य ,अखबार और लेखनी मर रहे हैं||
शुभकामनाय ,बधाई और जज़्बात हिंदी में कहने से डर रहे है।।
sorry, thanku ,excuse me आदि की कीमत बढ़ गयी है।।
देसी ज़बान पे foriegn language की परत चढ़ गई है।।
अनाथ की तरह हिंदी उर्दू बिलखती अपनों को ढूंढती खड़ी है।।
दूर कही कोने में ‘हिंदी ‘उर्दू ‘लज्जित पड़ी है।।
हिंदी दिवस की छलनी ह्रदय से शुभकामनाये।।
आइए आप और हम मिल कर हिंदी का अस्तित्व बचाएं।।
-ALOK UPADHYAY
सोमवार, 18 जनवरी 2016
अंग्रेज़ी VS अंग्रेज़ी : HINDI VS ENGLISH poem by ALOK UPADHYAY
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