कूलर की मशनूई हवा ही पीकर अब तक ज़िंदा हूँ, वरना ग्लोबल-वार्मिंग से मैं कब का मर जाता।
देखो साईंस ने कितनी तरक्की कर ली है॥
(C)परवेज़ ‘ईश्क़ी’
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