पता है क्या हूआँ जब उसने लिखी कविता मेरे लिए,
जल उठे मेरे आशा से भरे दिए
अब उसे भी चढ़ गया कविताओं का शोक
आने लगा उसके नगमो मे आलोक,
लगा उसे भी शब्दो का रोग,
पढ के हमारे दिल को..,
वो खूद को ना पाई रोक…
बैठी वो भी कागज और कलम लेकर,
चमक उठी आखेँ उसे इस तरह देखकर..,
वो जानती नही
की उसके शब्द मेरे लिए अनमोल है,
ये उसकी कलमो से कहे गएँ बोल है…!!!
-Alok upadhyay
-आलोक उपाध्याय

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