गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

जब उसने लिखी कविता मेरे लिए-आलोक उपाध्याय-Alok upadhyay

पता है क्या हूआँ जब उसने लिखी कविता मेरे लिए,
जल उठे मेरे आशा से भरे दिए
अब उसे भी चढ़ गया कविताओं का शोक
आने लगा उसके नगमो मे आलोक,
लगा उसे भी शब्दो का रोग,
पढ के हमारे दिल को..,
वो खूद को ना पाई रोक…
बैठी वो भी कागज और कलम लेकर,
चमक उठी आखेँ उसे इस तरह देखकर..,
वो जानती नही
की उसके शब्द मेरे लिए अनमोल है,
ये उसकी कलमो से कहे गएँ बोल है…!!!
-Alok upadhyay
-आलोक उपाध्याय

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