बुधवार, 2 दिसंबर 2015

ला दोगे क्या ...

ला दोगे क्या …

तारों भरी रात चाहिये मुझे
ला दोगे क्या
चाँद को जलने दो
नैनों से पिरो लेंगे वो बारात ।

फूलों भरी वादी चाहिए मुझे
ला दोगे क्या
भँवरों को तरसने दो
फूलों की महक से करेंगे मुलाक़ात ।

ढलता सूरज चाहिए मुझे
डुबो दोगे क्या
उसकी लाली को पिघलने दो
पूछेंगे कैसे करता हर दिन करामात ।

गहरा समंदर चाहिए मुझे
ठहरा दोगे क्या
लहरों को संभलने दो
बहते पानी में ढूंढेंगे जज़्बात ।

— स्वाति नैथानी

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