ला दोगे क्या …
तारों भरी रात चाहिये मुझे
ला दोगे क्या
चाँद को जलने दो
नैनों से पिरो लेंगे वो बारात ।
फूलों भरी वादी चाहिए मुझे
ला दोगे क्या
भँवरों को तरसने दो
फूलों की महक से करेंगे मुलाक़ात ।
ढलता सूरज चाहिए मुझे
डुबो दोगे क्या
उसकी लाली को पिघलने दो
पूछेंगे कैसे करता हर दिन करामात ।
गहरा समंदर चाहिए मुझे
ठहरा दोगे क्या
लहरों को संभलने दो
बहते पानी में ढूंढेंगे जज़्बात ।
— स्वाति नैथानी
Read Complete Poem/Kavya Here ला दोगे क्या ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें