वो लम्हा मुझसे दूर ही रहे
जिस लम्हे में तू मेरे पास न रहे
दिल ये कहते बार बार रहे
तू हर लम्हा मेरे साथ ही रहे
दर्द तुझे कोई देते रहे
एक कदम आगे बढ़ा वो दर्द मेरे हाथ लेते रहे
हर सिलवट तेरे माथे से दूर करू
चाहे माथे पर मेरे कलंक लगते रहे
चिंता की चिता ना बनने दू तुझे
चाहे उससे पहले जिस्म मेरा राख बनते रहे
– काजल / अर्चना

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