ये मुरझाए कमल तो देखो होता परिभाषित वक्त । इनमें खुदको देख रहा हूँ और नैन से बहता रक्त ।। एक समय के थे ये राजा पर उजड चुका है तख्त । तसवीर है मेरी भी ऐसी ही हर पल हुआ है सख्त ।।
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