रविवार, 6 दिसंबर 2015

आतंकवाद

आतंकवाद

शिशु दूध के लिए रोए
तो माँ के लिए आतंकवाद
दोस्त की दोस्त से अनबन हो जाए
तो दोस्तों में हो जाए आतंकवाद
एक सहेली अपनी सहेली की गुड़िया छीन ले
तो सहेलियों में हो जाए आतंकवाद
कालेज में दलबदलू हो जाए
तो कालेज में हो जाए आतंकवाद
किसी प्रतियोगिता में कोई आगे निकल जाए
तो ग्रुप में फैल जाए आतंकवाद
एक पड़ोसिन पड़ोसियों की चुगली करती रहे
तो आसपास पड़ोसियों में आतंकवाद
सास बहू की गलतियाँ निकालती रहे
तो बहू के लिए हो जाए आतंकवाद
बहू सास पर हुक्म चलाए
तो सास के लिए आतंकवाद
बाप बेटे को कुछ काम कहे
तो बेटा कहे यह है आतंकवाद
बेटा बूढ़े बाप की बात न माने
तो सारे घर में हो जाए आतंकवाद
आतंक घर घर फैल रहा
तो ऐसे फैले विश्व में आतंकवाद ====
——————————————– संतोष गुलाटी

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