रविवार, 6 दिसंबर 2015

परीक्षा सी है तूं.... (रै कबीर)

तूझे मिटा नहीं सकता
उभरे अक्षरों IMG_20151031_135728
सच्ची है मोहब्बत की लिखावट मेरी
उस पर पक्की स्याही है तूं
शब्द मात्र मजबूर कर दे
ऐसी कविता का भंडार है तूं
लिख लिया!
पढ लिया!
और सीख लिया!
तेरा सार भी कर लिया!!!
अब आखिरी वर्ष की परीक्षा है तूं…..

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