गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

"विदाई"

है आज एक दुल्हन की विदाई!
दिल सहमा हुआ, धडकन है तेज ,
आँखो मे आँसू , दिल मे है कुछ ख्वाहिशे ,
हो रही है एक दुल्हन की विदाई !!..

अपनो को पराए और पराए को अपना करते हुए ,
खाई कुछ कसमो को निभाने की कोशिश करते हुए ,
रो रहा है दिल , कह रही है आत्मा,
न छोड जाऊ अपनो को,
हो रही है एक दुल्हन की विदाई !!

दिमाग यही सोचता है कैसे होंगे सभी,
क्या मुझे समझ पाएंगे,

गलतियो मे मुझे माफ कर पाएंगे,
ऐसी सोच रखे,
दिल व दिमाग मै एक उलझन सी है,
क्या दहेज के लिए प्रताडित करेंगे मुझे,
क्या लालच की आग मे झुलस जाऊगी मै,
यही कसमोकस लिए,
हो रही है एक दुल्हन की विदाई !!!…

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