गुरुवार, 3 दिसंबर 2015

मुक्तक -"माँ "- शकुंतला तरार

“माँ”

सर जहां पर झुके वो मां के चरन
तीर्थ कहते जिसे वो मां के चरन
जिसके चरणों की धूल से जीवन
धाम बन जाये उस मां को नमन ||
शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)

Share Button
Read Complete Poem/Kavya Here मुक्तक -"माँ "- शकुंतला तरार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें