जब जब कलम ने आवाज उठाई है दुनिया में सदैव नई क्रांति छाई है बंद हो जाए जब राहे हर दिशा से तब तब कलम ने ही राह दिखाई है !!
! ! ! डी. के. निवातिया ……!!
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