मुक्तक “डरता हूँ” तुम्हारे लब पे मेरा नाम जो ठहर जाये, तुम्हारे दिल में मेरा अक्श जो उतर जाये, तुम्हें हवा भी अगर छू ले डरता हूँ, कहीं तुम्हारे हाथ का वो फूल ना बिखर जाये || शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)
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