मेरी डायरी के पन्ने
मेरी डायरी के पन्ने बुलाते है मुझे
लिखना भूल गयी तुम ये बताते हैं मुझे
सूने पड़े उन पन्नो पर तू अपनी कलम तो रख
राहे खुद बखुद बन जाएँगी तू बढ़ के एक कदम तो रख
रंग बिरंगी स्याही से रंग दे उन पन्नो को
जी भर के जीले जीवन के हर लम्हे को
चुन ले खुशियों के फूल जीवन के दामन से
खुद बखुद खुशियां बिखर जाएँगी तेरे आँगन मे
तू मुस्कुरा के उनपे अपना हक़ तो रख
बड़ी दिलचस्प है ये ज़िंदगी ये सुनाते हैं मुझे
मेरी डायरी के वो पन्ने बुलाते हैं मुझे
डायरी के हर पन्ने पर मैं रोज़ कुछ नया लिखती हूँ
न थकती हूँ न रूकती हूँ बस लिखती ही रहती हूँ
रुकना तेरा काम नहीं है तुझको चलते जाना है
जीवन के हर पन्ने को एक नए रंग से सजाना है
रंग बिरंगी स्याही कलम की यही बताती है मुझे
मेरी डायरी क वो पन्ने बुलाते है मुझे
लिखना भूल गयी तुम ये बताते है मुझे
शनिवार, 9 जनवरी 2016
मेरी डायरी के पन्ने
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