वो हमसफ़र अब तो आ
सावन घटा बनके छा
बरस-बरस के मेरे आँगन
तन-मन को तू मेरे भीगा
वो हमसफ़र अब तो आ …1
हँसी मनचली दीवानी को
मासूम मस्तानी लड़की को
आ जा न गले लगा
यूँ न ऐसे तड़पा
वो हमसफ़र अब तो आ …2
सँजते-सँवरते हैं रातों में भी
सुरमा लगाते हैं आखों में भी
पतझड़ हैं ये ज़िंदगी
बसंत बनके तू छा जा
वो हम सफ़र अब तो आ .. 3
तेरे नाम लिखती हूँ अपनी हाथों में
तुझे बसाती हूँ हरघडी मैं सासों में
न डर ज़माने से निभा तू वादा
तू जोड़ टूटी हुई प्रेम धागा
वो हमसफ़र अब तो आ …4
बेरंग ज़िंदगी में रंग तो ला
सूखी सागर प्रेम से भर जा
लेके आजा दर्दे दिल की दवा
खामोश चेहरा में फूल खिला
वो हमसफ़र अब तो आ …5
@@ Dushyant Kumar patel @@
Read Complete Poem/Kavya Here वो हमसफ़र अब तो आ (गीत)
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